इतिहास
“अज्ञानता मानव जीवन का अंधकार है और ज्ञानार्जन उषाकाल। ”
13 जून 1967 को 4 बालक और 2 बालिकाओं को एकत्रित कर एक गरीब की कुटिया में ज्ञानार्जन के कार्य का शुभारम्भ किया गया।
इसके नामकरण का प्रथम शब्द "ज्ञान" और इसके शुभारम्भ का स्थल, भोईवाड़ा की गरीब बस्ती का एक मंदिर (धर्मराज जी का देवरा) है, अतः इसके नामकरण का दूसरा शब्द "मंदिर", इस प्रकार यह "ज्ञान मंदिर" बना।
विध्यालय की कार्य-पद्धति, गुरुजनों की लगन और निष्ठा के परिणामस्वरूप भोईवाड़ा के बाद दूसरी शाखा हिरण मगरी, सेक्टर-4 में 7 अप्रैल 1976 से तथा तीसरी शाखा उदयपुर-सलूम्बर मार्ग पर स्थित धोल की पाटी में 15 मार्च 2001 से कार्यरत है। साथ ही संस्था ने उपेक्षित वृद्ध जनों के खान-पान-आवास और चिकित्सा की सुविधा हेतु 15 फरवरी 2003 से "सत्य" (संन्यासाश्रम) की शुरुआत की।
वर्तमान में संस्था की निम्न शाखायें है-
- ज्ञान मंदिर, भोईवाड़ा, उदयपुर (उच्च माध्यमिक) : 0294-2524518
- ज्ञान मंदिर, हिरण मगरी, सेक्टर-4, उदयपुर (उच्च माध्यमिक) : 0294-2460684
- श्री बा. सु. चोर्डिया ज्ञान मंदिर, धोल की पाटी, उदयपुर (उच्च प्राथमिक) : 0294-2650022
- 'सत्य' (संन्यासाश्रम) धोल की पाटी, उदयपुर : 0294-2650032
मिशन
विध्यालय का मुख्य उद्देश्य समाज के निर्धन वर्ग के बालक-बालिकाओं को सुशिक्षित करने के साथ-साथ उन्हें इतना दक्ष एवं योग्य बनाना है कि वे अपनी निर्धनता के अभिशाप से ऊपर उठकर स्वावलम्बी बनते हुए राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान कर सकें।
विजन
विध्यालय बालक-बालिकाओं को बेहतरीन शिक्षा देने के साथ-साथ उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और नैतिक विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। विध्यालय का संकल्प अपने विध्यार्थी को अपने आप में इतना दृढ बनाना है कि वे समाज में व्याप्त अमानुषता, दिशाहीनता, भ्रष्टता, अनैतिकता और अकर्मण्यता जैसे विकारों से दूर रहते हुए, एक ज्योतिपुंज और प्रकाशदीप की तरह अडिग और अटल बने तथा सारी बाधाओं पर विजय प्राप्त कर राष्ट्र का गौरव बढ़ा सकें।
विध्यालय का विवरण
| यात्रा प्रारंभ हुई | 13th जून 1967 |
| संबद्धता | शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार |
| पंजीकरण संख्या | 5/1968-69 |
| पंजीकरण दिनांक | 16/04/1968 |
| समाज का नाम | ज्ञान मंदिर समिति |
| संस्थापक | श्री टीकम चंद जी असावरा (भाई साहब) |
| 31/03/2019 तक छात्र | 1929 |
| 31/03/2019 तक अध्यापक | 70 |
| पता | ज्ञान मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-4, हिरण मगरी, उदयपुर |
इन्फ्रास्ट्रक्चर
| विध्यालय परिसर का क्षेत्र | 205 x 192 वर्ग फुट |
| निर्मित क्षेत्र | 156 x 116 वर्ग फुट |
| खेल का मैदान क्षेत्र | कुल 4700 वर्ग फुट |
| अन्य सुविधाएं | |
| बहुउद्देशीय हॉल | 45 x 67 वर्ग फुट |
| लाइब्रेरी क्षेत्र | 14 x 57 वर्ग फुट |
सुविधायां
विध्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देने के साथ-साथ उनके बहुँमुखी विकास के लिए और उन्हें एक बेहतरीन परिवेश देने के लिए विध्यालय सदैव तत्पर रहा है। कक्षाओं के बाहर विध्यार्थियों की सुविधापूर्वक आवाजाही के लिए चौड़े एवं खुले हवादार गलियारे है। छोटे-छोटे बच्चों के खेलने के लिए अलग से जगह है। भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और कम्प्यूटर के लिए अलग-अलग प्रयोगशालाएँ है। वॉलीबॉल, बास्केट-बॉल, हैंड-बॉल, बैडमिंटन, खो-खो और कबड्डी जैसे खेलों के लिए अलग-अलग खेल-मैदान है। हरे-भरे, बड़े छायादार वृक्ष और दूसरे कई प्रकार के पौधे हैं। पाठ्यक्रम के अलावा भी बच्चों में पढ़ने की अभिरुचि जागृत करने के लिए एक समृद्ध पुस्तकालय हैं, जिसमें लगभग 4000 पुस्तकें उपलब्ध हैं। शिक्षा को आधुनिक तकनीक की मदद से सुगम बनाने के उद्देश्य से स्मार्ट-क्लासेज उपलब्ध है। इन सब के अलावा भी संगीत, कला, हस्त-कला एवं शिल्प-कला में अभिरुचि को निखारने के लिए अलग से कक्षाओं का आयोजन किया जाता हैं।
पुस्तकालय
विध्यालय परिवार के सभी सदस्यों में कुछ नया पढ़ने, कुछ नया सीखने की अभिलाषा जागृत करने के लिए एक समृद्ध पुस्तकालय हैं, जिसमें लगभग 4000 पुस्तकें उपलब्ध हैं। उपन्यास, कविताएँ, कहानियाँ, लेख, महापुरुषों की जीवनियाँ एवं उनकी आत्मकथाएँ, धार्मिक-ग्रन्थ और विविध विषयों पर अलग-अलग लेखकों की लिखी हुई अनेकों पुस्तकें उपलब्ध हैं। अगली कक्षा में जाने वाले कई विध्यार्थी भी स्वेच्छा से अपनी पाठ्य-पुस्तकें इस पुस्तकालय में जमा करवाते हैं ताकि उस कक्षा में आने वाले निर्धन विध्यार्थियों को वो पुस्तकें निःशुल्क उपलब्ध हो सकें।
| लाइब्रेरी का आकार | 14 x 57 Sq फीट |
| समाचार पत्रों की संख्या | 3 |
| पत्रिकाओं की संख्या | 12 |
| पुस्तकों की संख्या | 4000 |
परिवहन
विध्यार्थियों और अध्यापकों को शहर के हर कोने से सुविधापूर्वक और सुरक्षित तरीके से विध्यालय तक लाने के लिए बस की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में कुल 7 बसें अलग-अलग मार्ग पर गतिशील है। स्वैच्छिक रूप से बस का विकल्प चुनने वाले विध्यार्थियों और अध्यापकों को विध्यालय बेहद कम शुल्क में बस सेवा प्रदान कर रहा है।
अध्यापक
विध्यालय के अध्यापक यहाँ की शान है। यहाँ के अध्यापक केवल मात्र वेतन भोगी कर्मचारी नहीं वरन विध्यार्थियों को एक बेहतर भविष्य देने के लिए दृढ-संकल्प गुरुजन हैं। यहाँ के गुरुजनों की लगन, निष्ठा और समर्पण की बदौलत विध्यालय का परिणाम बोर्ड की परीक्षाओं में विगत कई वर्षों से शत-प्रतिशत रहा है। वर्तमान में कुल 70 अध्यापक विध्यालय की तीनों शाखाओं में अपनी सेवाएँ दे रहे है।