सूर्य नमस्कार कार्यक्रम 2025: विद्यार्थियों में स्वास्थ्य और संस्कारों का समावेश
परिचय
शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए योग का विशेष महत्व है। इसी कड़ी में “सूर्य नमस्कार कार्यक्रम 2025” का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में योग के प्रति जागरूकता फैलाना और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था। शिक्षा विभाग द्वारा Shala Darpan एवं Private School Portal (PSP) के माध्यम से इसे अनिवार्य रूप से लागू किया गया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।
सूर्य नमस्कार का महत्व
सूर्य नमस्कार योग की एक प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें 12 आसनों का संयोजन होता है। यह न केवल शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि मानसिक शांति, एकाग्रता और अनुशासन भी विकसित करता है। इसके नियमित अभ्यास से विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, जिससे वे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
कार्यक्रम की रूपरेखा
दिनांक 3 फरवरी 2025 को प्रातः 9:00 बजे विभिन्न स्कूलों में सूर्य नमस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया। सभी स्कूलों ने Shala Darpan एवं PSP पोर्टल पर अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकगण, विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
विद्यार्थियों का उत्साह और सहभागिता
इस आयोजन में छात्रों ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। योग प्रशिक्षकों और शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने सूर्य नमस्कार की विभिन्न मुद्राओं का अभ्यास किया। प्रारंभ में शिक्षकों ने छात्रों को सूर्य नमस्कार की तकनीक और उसके लाभों की जानकारी दी, जिससे उनमें योग के प्रति रुचि और अधिक बढ़ी।
शारीरिक और मानसिक लाभ
इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने न केवल योग की कला सीखी बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प भी लिया। सूर्य नमस्कार से विद्यार्थियों को कई लाभ हुए, जैसे –
- शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार: यह शरीर को स्फूर्तिवान और ऊर्जावान बनाता है।
- मानसिक एकाग्रता: विद्यार्थियों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में वृद्धि होती है।
- संस्कार और अनुशासन: नियमित अभ्यास से अनुशासन और आत्मनियंत्रण की भावना विकसित होती है।
- सकारात्मक सोच: यह मानसिक शांति और सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
शिक्षकों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों ने इस पहल की सराहना की। शिक्षकों का मानना था कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास होता है। कई अभिभावकों ने भी इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को घर पर भी नियमित रूप से सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराएंगे।
सूर्य नमस्कार – ज्ञान मंदिर, भोईवाड़ा की कुछ झलकियां
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